होम · AstroBharat

उत्पन्ना एकादशी

मार्गशीर्ष कृष्ण एकादशी

मार्गशीर्ष · कृष्ण पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

परंपरा में इसी दिन एकादशी देवी का प्रकट होना माना गया है, इसलिए एकादशी का व्रत आरंभ करने के लिए यह शुभ मानी जाती है।

कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, मुर नाम का एक शक्तिशाली दैत्य देवताओं को सताने लगा। भगवान विष्णु ने उससे लंबा युद्ध किया। विश्राम के समय जब दैत्य ने भगवान पर आक्रमण करना चाहा, तब भगवान के दिव्य तेज से एक शक्ति प्रकट हुई। उस देवी ने दैत्य का वध कर दिया। भगवान विष्णु जागे तो उन्होंने देवी की वीरता से प्रसन्न होकर वर माँगने को कहा। देवी ने निवेदन किया कि जो व्यक्ति उनके दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करे, उसके पाप दूर हों और उसे भगवान की कृपा मिले। भगवान ने उन्हें “एकादशी” नाम दिया और इस तिथि को व्रत के लिए पवित्र घोषित किया।

उत्पन्ना एकादशी का संदेश है कि ईश्वर की शरण, आत्मसंयम और धर्म का पालन मनुष्य को बुराइयों से लड़ने की शक्ति देता है।

🙏 हे भगवान विष्णु, हमें सद्बुद्धि, संयम और भक्ति प्रदान करें।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

शुक्रवार, 4 दिसंबर 2026
एकादशी तिथि: 3 दिसंबर 2026 23:04 से 4 दिसंबर 2026 23:45 तक
पारण: 5 दिसंबर 2026 को सूर्योदय (6:59 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (12:53 AM (+1d)) से पहले
बुधवार, 24 नवंबर 2027
एकादशी तिथि: 23 नवंबर 2027 13:45 से 24 नवंबर 2027 12:11 तक
पारण: 25 नवंबर 2027 को सूर्योदय (6:51 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (10:51 AM) से पहले
सोमवार, 13 नवंबर 2028
एकादशी तिथि: 12 नवंबर 2028 09:31 से 13 नवंबर 2028 06:42 तक
पारण: 14 नवंबर 2028 को सूर्योदय (6:43 AM) के बाद

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
← देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशीसभी एकादशीमोक्षदा एकादशी →
AI से चैट करें