मोक्षदा एकादशी
गीता जयंती · मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी
महत्त्व
माना जाता है कि इसी दिन कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता का उपदेश मिला, इसलिए इसे गीता जयंती भी कहते हैं। इस दिन गीता-पाठ की परंपरा है।
कथा
प्रचलित कथा में वैखानस नाम के धर्मात्मा राजा ने स्वप्न में अपने पिता को कष्ट में देखा। राजा बहुत व्याकुल हुए और ऋषियों से उपाय पूछा। एक मुनि ने उन्हें मार्गशीर्ष शुक्ल एकादशी का व्रत करने और उसका पुण्य अपने पिता के कल्याण के लिए समर्पित करने की सलाह दी। राजा ने श्रद्धा से भगवान विष्णु की पूजा की, व्रत रखा और पुण्य अपने पिता को अर्पित किया। कथा के अनुसार, इस पुण्य से पिता को कष्टों से मुक्ति मिली और राजा के मन को शांति प्राप्त हुई।
मोक्षदा एकादशी का संदेश है कि भक्ति के साथ पितरों का स्मरण, दान और सद्कर्म भी महत्वपूर्ण हैं।
🙏 हे नारायण, हमारे पितरों को शांति दें और हमें धर्ममय जीवन जीने की प्रेरणा दें।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 21 दिसंबर 2026 को सूर्योदय (7:09 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (5:37 PM) से पहले
पारण: 10 दिसंबर 2027 को सूर्योदय (7:03 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (2:54 AM (+1d)) से पहले
पारण: 28 नवंबर 2028 को सूर्योदय (6:54 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (4:14 AM (+1d)) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।