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देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी

देवोत्थान एकादशी · कार्तिक शुक्ल एकादशी

कार्तिक · शुक्ल पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं और चातुर्मास समाप्त होता है। इसी दिन तुलसी विवाह होता है और विवाह आदि मांगलिक कार्य फिर शुरू होते हैं।

कथा

कार्तिक शुक्ल एकादशी को देवउठनी या प्रबोधिनी एकादशी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चातुर्मास की योगनिद्रा से जागते हैं। इस अवसर पर घरों और मंदिरों में पूजा, दीपदान और तुलसी पूजन किया जाता है। कई स्थानों पर तुलसी विवाह भी इसी समय आयोजित होता है। कथा-परंपरा में बताया जाता है कि भगवान के जागरण से शुभ कार्यों का नया समय आरंभ होता है। श्रद्धालु घर की सफाई करते हैं, पूजा करते हैं और भगवान से परिवार की मंगलकामना करते हैं।

देवउठनी एकादशी का संदेश है कि आलस्य और निराशा से उठकर नए उत्साह, सेवा और सदाचार के साथ जीवन की शुरुआत करें।

🙏 हे श्रीहरि, हमारे जीवन में शुभता, जागरूकता और भक्ति का प्रकाश भर दें।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

शुक्रवार, 20 नवंबर 2026
एकादशी तिथि: 20 नवंबर 2026 07:16 से 21 नवंबर 2026 06:31 तक
पारण: 21 नवंबर 2026 को सूर्योदय (6:48 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (4:57 AM (+1d)) से पहले
बुधवार, 10 नवंबर 2027
एकादशी तिथि: 9 नवंबर 2027 07:35 से 10 नवंबर 2027 09:11 तक
पारण: 11 नवंबर 2027 को सूर्योदय (6:40 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (10:08 AM) से पहले
शनिवार, 28 अक्टूबर 2028
एकादशी तिथि: 28 अक्टूबर 2028 03:47 से 29 अक्टूबर 2028 06:21 तक
पारण: 29 अक्टूबर 2028 को सूर्योदय (6:31 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (8:52 AM (+1d)) से पहले

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
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