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पवित्रा (श्रावण पुत्रदा) एकादशी

श्रावण शुक्ल एकादशी · पवित्रोपना

श्रावण · शुक्ल पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

संतान की कामना और संतान के कल्याण के लिए यह व्रत रखा जाता है। कुछ परंपराओं में इसे पवित्रा या पवित्रोपना एकादशी भी कहते हैं।

कथा

प्राचीन समय में महिष्मती के राजा महिजित धर्मात्मा थे, लेकिन उन्हें संतान नहीं थी। वे इस कारण दुखी रहते थे। मंत्रियों और प्रजा ने ऋषियों से राजा की चिंता का समाधान पूछा। ऋषियों ने बताया कि श्रावण शुक्ल एकादशी का व्रत और भगवान विष्णु की पूजा राजा के लिए शुभ होगी। राजा तथा प्रजा ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया और उसका पुण्य राजा के कल्याण के लिए समर्पित किया। कथा के अनुसार, भगवान की कृपा से राजा को संतान प्राप्त हुई और राज्य में आनंद छा गया।

श्रावण पुत्रदा एकादशी का संदेश है कि परिवार की मंगलकामना के साथ बच्चों के पालन-पोषण, शिक्षा और संस्कारों की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए।

🙏 हे भगवान, सभी परिवारों को सुख, शांति और बच्चों के लिए सुरक्षित वातावरण दें।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

रविवार, 23 अगस्त 2026
एकादशी तिथि: 23 अगस्त 2026 02:00 से 24 अगस्त 2026 04:19 तक
पारण: 24 अगस्त 2026 को सूर्योदय (5:55 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (6:21 AM (+1d)) से पहले
गुरुवार, 12 अगस्त 2027
एकादशी तिथि: 12 अगस्त 2027 00:59 से 13 अगस्त 2027 03:00 तक
पारण: 13 अगस्त 2027 को सूर्योदय (5:49 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (5:22 AM (+1d)) से पहले
मंगलवार, 1 अगस्त 2028
एकादशी तिथि: 31 जुलाई 2028 08:49 से 1 अगस्त 2028 08:51 तक
पारण: 2 अगस्त 2028 को सूर्योदय (5:43 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (9:25 AM) से पहले

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
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