कामिका एकादशी
श्रावण कृष्ण एकादशी
महत्त्व
सावन में आने वाली इस एकादशी पर तुलसी-पूजन और भगवान विष्णु के स्मरण का विशेष महत्त्व बताया जाता है।
कथा
श्रावण कृष्ण एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है। इसकी महिमा में बताया गया है कि भगवान विष्णु की श्रद्धापूर्वक पूजा, तुलसी अर्पण, दीपदान और दान-पुण्य से मन शुद्ध होता है। एक कथा में एक व्यक्ति अपने कर्मों को लेकर चिंतित था। उसे संतों ने समझाया कि पश्चात्ताप के साथ गलत काम छोड़ना, सेवा करना और भगवान का स्मरण करना चाहिए। उसने कामिका एकादशी पर पूजा की और अपने आचरण में परिवर्तन का संकल्प लिया।
कामिका एकादशी का संदेश है कि भक्ति का वास्तविक प्रभाव मन और व्यवहार में दिखाई देना चाहिए।
🙏 हे विष्णु भगवान, हमारे मन से द्वेष दूर करें और हमें सेवा के योग्य बनाएँ।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 10 अगस्त 2026 को सूर्योदय (5:48 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (8:01 AM) से पहले
पारण: 30 जुलाई 2027 को सूर्योदय (5:41 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (2:19 AM (+1d)) से पहले
पारण: 19 जुलाई 2028 को सूर्योदय (5:36 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (3:22 PM) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।