अजा एकादशी
भाद्रपद कृष्ण एकादशी
महत्त्व
इसे संकट और दुर्भाग्य दूर करने वाली एकादशी माना जाता है। कथा सत्य और धैर्य का संदेश देती है।
कथा
राजा हरिश्चंद्र सत्य और वचनपालन के लिए प्रसिद्ध थे। कठिन परिस्थितियों में उन्हें अपना राज्य और परिवार छोड़ना पड़ा तथा अनेक कष्ट सहने पड़े। फिर भी उन्होंने सत्य का मार्ग नहीं छोड़ा। एक समय उन्हें एक ऋषि से भाद्रपद कृष्ण एकादशी के व्रत का महत्व ज्ञात हुआ। उन्होंने श्रद्धा से भगवान का स्मरण किया और व्रत किया। कथा के अनुसार, उनके कष्ट दूर हुए, परिवार से पुनर्मिलन हुआ और उन्हें सम्मान प्राप्त हुआ।
अजा एकादशी का संदेश है कि विपत्ति के समय भी सत्य, धैर्य और कर्तव्य का त्याग नहीं करना चाहिए।
🙏 हे प्रभु, हमें कठिन समय में सत्य पर अडिग रहने की शक्ति दें।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 8 सितंबर 2026 को सूर्योदय (6:03 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (2:43 PM) से पहले
पारण: 29 अगस्त 2027 को सूर्योदय (5:58 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (9:36 AM) से पहले
पारण: 17 अगस्त 2028 को सूर्योदय (5:52 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (1:44 AM (+1d)) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।