रमा एकादशी
कार्तिक कृष्ण एकादशी
महत्त्व
दीपावली से कुछ दिन पहले आने वाली यह एकादशी देवी लक्ष्मी (रमा) के नाम पर है।
कथा
कार्तिक कृष्ण एकादशी को रमा एकादशी कहा जाता है। इसकी महिमा में भगवान विष्णु की भक्ति और व्रत के प्रभाव से संकटों के दूर होने का वर्णन मिलता है। एक प्रचलित कथा में मुचुकुंद नाम के राजा की पुत्री चंद्रभागा अपने पति के साथ धर्मपूर्वक जीवन बिताती थी। उसके पति ने रमा एकादशी का व्रत श्रद्धा से किया। कथा के अनुसार, इस व्रत के पुण्य से उसे शुभ फल प्राप्त हुए और परिवार में मंगल हुआ।
रमा एकादशी का संदेश है कि पति-पत्नी और परिवार के सदस्य एक-दूसरे के कल्याण की कामना करें तथा धर्म, प्रेम और सदाचार के साथ जीवन बिताएँ।
🙏 हे भगवान विष्णु, सभी परिवारों में प्रेम, विश्वास और सुख बनाए रखें।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 6 नवंबर 2026 को सूर्योदय (6:37 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (10:31 AM) से पहले
पारण: 26 अक्टूबर 2027 को सूर्योदय (6:29 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (1:04 AM (+1d)) से पहले
पारण: 15 अक्टूबर 2028 को सूर्योदय (6:22 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (7:17 PM) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।