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परिवर्तिनी (पद्मा) एकादशी

वामन एकादशी · भाद्रपद शुक्ल एकादशी

भाद्रपद · शुक्ल पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

मान्यता है कि चातुर्मास की निद्रा में भगवान विष्णु इस दिन करवट बदलते हैं, इसलिए यह परिवर्तिनी कहलाती है। इसे वामन अवतार से भी जोड़ा जाता है।

कथा

भाद्रपद शुक्ल एकादशी को परिवर्तिनी, पार्श्व या पद्मा एकादशी भी कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, चातुर्मास में भगवान विष्णु योगनिद्रा के दौरान करवट बदलते हैं, इसलिए इस तिथि का नाम परिवर्तिनी पड़ा। इस दिन भगवान वामन की पूजा की परंपरा भी है। वामन अवतार की कथा में भगवान विष्णु ने राजा बलि से तीन पग भूमि माँगी और अपने विराट रूप से तीनों लोक नाप लिए। राजा बलि ने अपना वचन निभाया और भगवान के प्रति समर्पण दिखाया।

इस एकादशी का संदेश है कि अहंकार के स्थान पर विनम्रता, वचनपालन और ईश्वर के प्रति समर्पण को महत्व दें।

🙏 हे वामन भगवान, हमें विनम्रता और सत्यनिष्ठा प्रदान करें।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

मंगलवार, 22 सितंबर 2026
एकादशी तिथि: 21 सितंबर 2026 20:01 से 22 सितंबर 2026 21:43 तक
पारण: 23 सितंबर 2026 को सूर्योदय (6:10 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (10:51 PM) से पहले
शनिवार, 11 सितंबर 2027
एकादशी तिथि: 10 सितंबर 2027 17:00 से 11 सितंबर 2027 19:36 तक
पारण: 12 सितंबर 2027 को सूर्योदय (6:04 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (10:13 PM) से पहले
बुधवार, 30 अगस्त 2028
एकादशी तिथि: 29 अगस्त 2028 19:31 से 30 अगस्त 2028 20:47 तक
पारण: 31 अगस्त 2028 को सूर्योदय (5:59 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (10:31 PM) से पहले

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
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