संकष्टी चतुर्थी — तिथि और चंद्रोदय
हर कृष्ण चतुर्थी का गणेश व्रत, चंद्रोदय के समय के साथ।
संकष्टी चतुर्थी हर महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को भगवान गणेश के लिए रखा जाने वाला व्रत है। व्रत वाले दिन वह माना जाता है जिस दिन चंद्रोदय के समय चतुर्थी तिथि हो। व्रती दिन भर उपवास (प्रायः फलाहार) रखते हैं, संध्या को गणेश जी की पूजा करते हैं और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलते हैं।
मंगलवार को पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को अंगारकी चतुर्थी कहा जाता है; मान्यता है कि इसका विशेष पुण्य होता है।
चतुर्थी 23 फ़रवरी 2027 और 24 फ़रवरी 2027 को चंद्रोदय पर मिलती है — ऊपर दिया दिन वह है जिस दिन तिथि चंद्रोदय के बाद अधिक देर रहती है; स्थानीय पंचांग देखें।
इस बार चतुर्थी दो चंद्रोदयों के बीच ही पूरी हो जाती है; यहाँ वह दिन दिखाया है जिसकी संध्या में तिथि सबसे अधिक रहती है।
चतुर्थी 23 मई 2027 और 24 मई 2027 को चंद्रोदय पर मिलती है — ऊपर दिया दिन वह है जिस दिन तिथि चंद्रोदय के बाद अधिक देर रहती है; स्थानीय पंचांग देखें।
पूजा विधि
- सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लें और दिन भर उपवास रखें (स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार लिया जा सकता है)।
- संध्या को साफ़ स्थान पर गणेश जी की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें और दीपक जलाएँ।
- दूर्वा, लाल फूल, रोली, अक्षत चढ़ाएँ और मोदक या लड्डू का भोग लगाएँ।
- “ॐ गं गणपतये नमः” का जप करें और गणेश जी की आरती करें।
- चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को जल से अर्घ्य दें, फिर प्रसाद लेकर व्रत खोलें।
ॐ गं गणपतये नमः
चंद्रोदय का समय शहर के अनुसार बदलता है; नीचे दिल्ली का समय दिया है। अपने शहर का चंद्रोदय देखकर ही व्रत खोलें। जो उपवास कठिन हो, उसे अपने स्वास्थ्य के अनुसार हल्का कर सकते हैं।
तिथि और चंद्रोदय दिल्ली (IST) के लिए खगोलीय गणना से निकाले गए हैं; आपके शहर में चंद्रोदय कुछ मिनट आगे-पीछे होगा। जब चतुर्थी दो दिन चंद्रोदय पर मिलती है तो परंपरा के अनुसार दिन भिन्न हो सकता है — अपने पंचांग या पंडित जी से पुष्टि कर लें।