गणेश जी की आरती

श्री गणेश · बुधवार और किसी भी पूजा की शुरुआत में · रचना: पारंपरिक (सूरदास की छाप)

पूजा शुरू करने से पहले गणेश जी का स्मरण परंपरा है।

अक्षर का आकार

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।
माता जाकी पारवती पिता महादेवा॥

एकदन्त दयावन्त चारभुजाधारी।
माथे पर तिलक सोहे मूसे की सवारी।
पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे सन्त करें सेवा॥

अंधे को आँख देत कोढ़िन को काया।
बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया।
सूर श्याम शरण आए सफल कीजे सेवा।
जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा॥

आरती कैसे करें

दीपक (घी या तेल का) और कपूर जलाएँ, थाली में फूल और अक्षत रखें। इष्टदेव के सामने थाली को घड़ी की दिशा में, चरणों से मुख तक घुमाते हुए गाएँ; घंटी या ताली बजा सकते हैं। आरती के बाद थाली पर हाथ फेरकर आँखों से लगाएँ और प्रसाद बाँटें।

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