षटतिला एकादशी
माघ कृष्ण एकादशी
महत्त्व
इस दिन तिल का छह प्रकार से प्रयोग किया जाता है — तिल मिले जल से स्नान, उबटन, हवन, तर्पण, भोजन और दान। इसी से ‘षट’ (छह) ‘तिला’ नाम पड़ा।
कथा
एक धर्मपरायण स्त्री तप और व्रत करती थी, परंतु दान करने में संकोच करती थी। भगवान ने उसे समझाया कि केवल निजी तपस्या ही नहीं, जरूरतमंदों की सहायता भी धर्म का महत्वपूर्ण अंग है। तिल का इस व्रत में विशेष महत्व बताया गया है—तिल से स्नान, तिल का दान, तिल का हवन और तिल का उपयोग पुण्यकारी माना गया है। कथा का भाव यह है कि श्रद्धा के साथ उदारता भी होनी चाहिए। भोजन, वस्त्र या आवश्यक वस्तुएँ अपनी सामर्थ्य के अनुसार दान करने से समाज में करुणा बढ़ती है।
षटतिला एकादशी का संदेश है कि संयम के साथ दान और सेवा भी अपनाएँ।
🙏 हे प्रभु, हमें लोभ से दूर रखकर उदार और सेवाभावी बनाइए।
यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।
तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)
पारण: 15 जनवरी 2026 को सूर्योदय (7:15 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (8:17 PM) से पहले
पारण: 3 फ़रवरी 2027 को सूर्योदय (7:08 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (1:51 PM) से पहले
पारण: 23 जनवरी 2028 को सूर्योदय (7:13 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (2:24 PM) से पहले
समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।