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पौष पुत्रदा (वैकुंठ) एकादशी

पौष शुक्ल एकादशी · वैकुंठ एकादशी

पौष · शुक्ल पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

संतान की कामना के लिए रखी जाती है। दक्षिण भारत में यह वैकुंठ एकादशी के रूप में बड़े उत्सव से मनाई जाती है, जब विष्णु मंदिरों में ‘वैकुंठ द्वार’ खोला जाता है।

कथा

प्राचीन कथा में भद्रावती नगरी के राजा सुकेतुमान और रानी शैव्या संतान न होने से दुखी थे। वे धर्मपूर्वक जीवन बिताते थे, फिर भी मन में चिंता रहती थी। एक दिन राजा वन में भटकते हुए ऋषियों के आश्रम पहुँचे। ऋषियों ने उन्हें पौष शुक्ल एकादशी का व्रत करने और भगवान विष्णु की आराधना करने का उपाय बताया। राजा-रानी ने श्रद्धा से व्रत किया और प्रार्थना की। कथा के अनुसार, भगवान की कृपा से उन्हें संतान प्राप्त हुई और उनके घर में आनंद छा गया।

पुत्रदा एकादशी का संदेश है कि संतान की कामना के साथ-साथ हर बच्चे के प्रति प्रेम, संरक्षण और अच्छे संस्कार भी आवश्यक हैं।

🙏 हे विष्णु भगवान, सभी बच्चों को स्वास्थ्य, सुरक्षा और सद्बुद्धि दें।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

मंगलवार, 19 जनवरी 2027
एकादशी तिथि: 18 जनवरी 2027 10:27 से 19 जनवरी 2027 07:50 तक
पारण: 20 जनवरी 2027 को सूर्योदय (7:14 AM) के बाद
शनिवार, 8 जनवरी 2028
एकादशी तिथि: 7 जनवरी 2028 20:30 से 8 जनवरी 2028 19:36 तक
पारण: 9 जनवरी 2028 को सूर्योदय (7:15 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (5:56 PM) से पहले
बुधवार, 27 दिसंबर 2028
एकादशी तिथि: 26 दिसंबर 2028 20:56 से 27 दिसंबर 2028 22:27 तक
पारण: 28 दिसंबर 2028 को सूर्योदय (7:13 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (11:22 PM) से पहले

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
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