होम · AstroBharat

अपरा (अचला) एकादशी

ज्येष्ठ कृष्ण एकादशी

ज्येष्ठ · कृष्ण पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

‘अपरा’ का अर्थ है अपार — अपार पुण्य देने वाली। कई स्थानों पर इसे अचला एकादशी भी कहते हैं।

कथा

अपरा एकादशी ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष में आती है। इसकी महिमा में धर्म और अधर्म के परिणामों का वर्णन मिलता है। कथा का मुख्य भाव यह है कि मनुष्य अपने कर्मों के लिए उत्तरदायी है, लेकिन सच्चा पश्चात्ताप, प्रार्थना, दान और धर्मपूर्ण जीवन उसे सुधार की दिशा में ले जा सकते हैं। इस दिन भगवान विष्णु का पूजन, जरूरतमंदों की सहायता और गलत आचरण छोड़ने का संकल्प करने की परंपरा है। केवल व्रत रखना ही नहीं, बल्कि व्यवहार में ईमानदारी और करुणा लाना भी महत्वपूर्ण माना जाता है।

अपरा एकादशी का संदेश है कि जीवन को अच्छे कर्मों से समृद्ध करें और किसी का अहित न करें।

🙏 हे नारायण, हमें सत्यनिष्ठ और परोपकारी बनाइए।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

बुधवार, 13 मई 2026
एकादशी तिथि: 12 मई 2026 14:52 से 13 मई 2026 13:30 तक
पारण: 14 मई 2026 को सूर्योदय (5:31 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (11:21 AM) से पहले
मंगलवार, 1 जून 2027
एकादशी तिथि: 31 मई 2027 10:02 से 1 जून 2027 09:40 तक
पारण: 2 जून 2027 को सूर्योदय (5:24 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (8:29 AM) से पहले
शनिवार, 20 मई 2028
एकादशी तिथि: 19 मई 2028 10:11 से 20 मई 2028 12:01 तक
पारण: 21 मई 2028 को सूर्योदय (5:27 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (1:20 PM) से पहले

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
← मोहिनी एकादशीसभी एकादशीनिर्जला एकादशी →
AI से चैट करें