होम · AstroBharat

कामदा एकादशी

चैत्र शुक्ल एकादशी

चैत्र · शुक्ल पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

चैत्र शुक्ल पक्ष की एकादशी हिंदू नववर्ष के बाद की पहली एकादशी है। मान्यता है कि यह मनोकामनाएँ पूरी करने वाली और पापों का शमन करने वाली है।

कथा

रत्नपुर नामक नगर में ललित नाम का गंधर्व अपनी पत्नी ललिता के साथ रहता था। एक बार सभा में गाते समय ललित का ध्यान पत्नी की ओर चला गया और उससे गलती हो गई। राजा ने क्रोधित होकर उसे राक्षस होने का श्राप दे दिया। ललिता दुखी होकर सहायता खोजने लगी। एक ऋषि ने उसे चैत्र शुक्ल एकादशी का व्रत करने और उसका पुण्य पति को अर्पित करने का उपाय बताया। ललिता ने श्रद्धापूर्वक व्रत किया और भगवान विष्णु से प्रार्थना की। कथा के अनुसार, ललित श्राप से मुक्त होकर अपने पूर्व स्वरूप में लौट आया।

कामदा एकादशी का संदेश है कि प्रेम, निष्ठा, प्रार्थना और सुधार की भावना कठिन समय में आशा देती है।

🙏 हे नारायण, हमारे परिवारों में प्रेम, सद्भाव और क्षमा बनाए रखें।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

रविवार, 29 मार्च 2026
एकादशी तिथि: 28 मार्च 2026 08:46 से 29 मार्च 2026 07:46 तक
पारण: 30 मार्च 2026 को सूर्योदय (6:14 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (7:10 AM) से पहले
शनिवार, 17 अप्रैल 2027
एकादशी तिथि: 16 अप्रैल 2027 11:22 से 17 अप्रैल 2027 09:28 तक
पारण: 18 अप्रैल 2027 को सूर्योदय (5:53 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (7:43 AM) से पहले
बुधवार, 5 अप्रैल 2028
एकादशी तिथि: 5 अप्रैल 2028 07:46 से 6 अप्रैल 2028 04:58 तक
पारण: 6 अप्रैल 2028 को सूर्योदय (6:05 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (1:52 AM (+1d)) से पहले

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
← पापमोचनी एकादशीसभी एकादशीवरूथिनी एकादशी →
AI से चैट करें