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आमलकी एकादशी

रंगभरी एकादशी · फाल्गुन शुक्ल एकादशी

फाल्गुन · शुक्ल पक्षदेवता: भगवान विष्णु

महत्त्व

इस दिन आँवले के वृक्ष की पूजा की जाती है, जिसे विष्णु का प्रिय माना गया है। काशी में इसी दिन से रंगभरी एकादशी पर होली का उत्सव शुरू होता है।

कथा

एक प्राचीन नगर में राजा और प्रजा भगवान विष्णु के भक्त थे। आमलकी एकादशी के दिन सभी लोगों ने उपवास, पूजा और आँवले के वृक्ष की आराधना की। माना जाता है कि आँवले का वृक्ष पवित्रता और आरोग्य का प्रतीक है तथा इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ उसका सम्मान किया जाता है। कथा में बताया जाता है कि एक शिकारी भी उस धार्मिक वातावरण में पहुँचा। लोगों की भक्ति और सत्कर्मों का प्रभाव उसके मन पर पड़ा। मृत्यु के बाद उसे शुभ गति प्राप्त हुई, ऐसा वर्णन मिलता है।

आमलकी एकादशी का संदेश है कि प्रकृति का सम्मान, स्वास्थ्य की देखभाल और सामूहिक भक्ति मनुष्य के जीवन को बेहतर बनाते हैं।

🙏 हे विष्णु भगवान, हमें प्रकृति की रक्षा और सभी जीवों के प्रति दया करना सिखाएँ।

यह सरल हिन्दी में भक्ति-पाठ के लिए तैयार संक्षिप्त कथा है। अलग-अलग ग्रंथों और क्षेत्रों में नाम और विवरण भिन्न मिल सकते हैं; पूरी कथा अपनी परंपरा या पंडित जी से मिलाएँ।

तिथि और पारण (2026–2028, दिल्ली)

शुक्रवार, 27 फ़रवरी 2026
एकादशी तिथि: 27 फ़रवरी 2026 00:33 से 27 फ़रवरी 2026 22:33 तक
पारण: 28 फ़रवरी 2026 को सूर्योदय (6:48 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (8:44 PM) से पहले
गुरुवार, 18 मार्च 2027
एकादशी तिथि: 18 मार्च 2027 04:21 से 19 मार्च 2027 01:51 तक
पारण: 19 मार्च 2027 को सूर्योदय (6:27 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (11:18 PM) से पहले
मंगलवार, 7 मार्च 2028
एकादशी तिथि: 6 मार्च 2028 23:01 से 7 मार्च 2028 20:30 तक
पारण: 8 मार्च 2028 को सूर्योदय (6:38 AM) के बाद, द्वादशी समाप्त होने (5:28 PM) से पहले

समय IST में हैं। परंपरा अनुसार द्वादशी की पहली चौथाई (हरि वासर) में पारण नहीं किया जाता। वैष्णव परंपरा में व्रत अगले दिन हो सकता है; शहर के अनुसार भी एक दिन का अंतर संभव है — स्थानीय पंचांग से पुष्टि करें।

व्रत-विधि और नियमविष्णु आरतीकैलेंडर में देखें
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