दीपावली (लक्ष्मी पूजा)

कार्तिक अमावस्या

तिथि और समय

रविवार, 8 नवंबर 2026
तिथि 8 नवंबर 2026 और 9 नवंबर 2026 दोनों दिन रहती है — परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार दिन तय करें।
तिथि: 08/11 11:28 से 09/11 12:32 तक (IST)
सूर्यास्त 5:31 PM · प्रदोष काल लगभग 5:31 PM से 7:55 PM (दिल्ली)
शुक्रवार, 29 अक्टूबर 2027
तिथि 28 अक्टूबर 2027 और 29 अक्टूबर 2027 दोनों दिन रहती है — परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार दिन तय करें।
तिथि: 28/10 20:48 से 29/10 19:06 तक (IST)
सूर्यास्त 5:39 PM · प्रदोष काल लगभग 5:39 PM से 8:03 PM (दिल्ली)
मंगलवार, 17 अक्टूबर 2028
तिथि 17 अक्टूबर 2028 और 18 अक्टूबर 2028 दोनों दिन रहती है — परंपरा और स्थानीय पंचांग के अनुसार दिन तय करें।
तिथि: 17/10 12:05 से 18/10 08:26 तक (IST)
सूर्यास्त 5:49 PM · प्रदोष काल लगभग 5:49 PM से 8:13 PM (दिल्ली)

लक्ष्मी पूजा प्रदोष काल में, जब अमावस्या तिथि संध्या में उपस्थित हो, की जाती है। कई लोग प्रदोष में स्थिर लग्न (वृषभ) का समय चुनते हैं — वह समय अपने स्थानीय पंचांग से देखें।

महत्त्व

दीपावली प्रकाश का पर्व है। इस दिन संध्या को माँ लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है और घर-आँगन में दीपक जलाए जाते हैं। उत्तर भारत में इसे श्रीराम के अयोध्या लौटने की खुशी से जोड़ा जाता है; व्यापारी इस दिन बही-खातों का पूजन (चोपड़ा पूजन) करते हैं।

पूजा सामग्री

लक्ष्मी-गणेश की प्रतिमा या चित्र, कलश, आम के पत्ते, नारियल, रोली, अक्षत, कमल/गेंदे के फूल, खील-बताशे, मिठाई-फल, सिक्के, दीपक (घी/तिल का तेल), धूप, बही-खाते या औज़ार

पूजा विधि

  1. दिन में घर की सफ़ाई करें, मुख्य द्वार पर रंगोली और तोरण लगाएँ; संध्या को स्नान करके साफ़ वस्त्र पहनें।
  2. प्रदोष काल में पूजा-स्थान पर चौकी बिछाकर लक्ष्मी-गणेश की स्थापना करें और कलश रखें।
  3. संकल्प लेकर पहले गणेश जी की पूजा करें, फिर कलश-पूजन करें।
  4. माँ लक्ष्मी को रोली-अक्षत, कमल/गेंदे के फूल, खील-बताशे और मिठाई अर्पित करें; सिक्के और बही-खाते पूजा में रखें।
  5. “ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः” का जप करें और श्री सूक्त या लक्ष्मी स्तुति का पाठ करें।
  6. लक्ष्मी-गणेश की आरती करें और प्रसाद बाँटें।
  7. घर के हर कोने, द्वार और आँगन में दीपक जलाएँ।

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः

कथा

समुद्र-मंथन की कथा के अनुसार कार्तिक अमावस्या को माँ लक्ष्मी क्षीरसागर से प्रकट हुईं और भगवान विष्णु को वरण किया, इसीलिए इस दिन उनकी विशेष पूजा होती है। श्रीराम की कथा में चौदह वर्ष के वनवास और रावण-वध के बाद उनके अयोध्या लौटने पर नगरवासियों ने घर-घर दीप जलाकर स्वागत किया। उसी परंपरा में आज भी दीपावली मनाई जाती है।

घर में अमावस्या तिथि दो दिन में बँट सकती है; जिस दिन प्रदोष काल में अमावस्या हो, उसी दिन लक्ष्मी पूजा करें। बच्चों को पटाखे और दीपक जलाते समय सावधानी सिखाएँ।

यह प्रचलित परंपरा के आधार पर लिखी संक्षिप्त कथा और विधि है। क्षेत्र, परिवार और संप्रदाय के अनुसार रीति-रिवाज बदल सकते हैं; अपनी परंपरा या पंडित जी के निर्देश को प्राथमिकता दें। तिथि दिल्ली के लिए गणना की गई है।

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