नरक चतुर्दशी (छोटी दीवाली)
कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी
तिथि और समय
अभ्यंग स्नान सूर्योदय से पहले (चतुर्दशी में) किया जाता है; दीपक संध्या को जलाए जाते हैं। बंगाल में इसी रात काली चौदस की पूजा होती है।
महत्त्व
नरक चतुर्दशी को रूप चौदस और छोटी दीवाली भी कहा जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध करके 16,000 कन्याओं को मुक्त कराया। इस दिन सूर्योदय से पहले उबटन और अभ्यंग (तेल) स्नान की परंपरा है और संध्या को दीपक जलाए जाते हैं।
पूजा सामग्री
तिल का तेल, उबटन (बेसन-हल्दी-चंदन), साफ़ वस्त्र, दीपक, तेल-बाती, रंगोली का सामान, मिठाई
पूजा विधि
- सूर्योदय से पहले उठकर शरीर पर तिल का तेल लगाएँ और उबटन से स्नान करें (अभ्यंग स्नान)।
- स्नान के बाद साफ़ वस्त्र पहनकर भगवान कृष्ण या विष्णु का स्मरण करें।
- घर की सफ़ाई और रंगोली पूरी करें; कई घरों में इस दिन हनुमान जी की भी पूजा होती है।
- संध्या को घर के द्वार, आँगन और तुलसी के पास दीपक जलाएँ (अनेक परंपराओं में यम के नाम का दीप भी)।
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
कथा
कथा के अनुसार नरकासुर नामक दैत्य ने देवताओं और अनेक कन्याओं को बंदी बना लिया था। भगवान कृष्ण ने पत्नी सत्यभामा के साथ युद्ध करके चतुर्दशी के दिन उसका वध किया और सभी को मुक्त कराया। इसी विजय की प्रसन्नता में अगले दिन दीपों का उत्सव मनाया गया।
इस तिथि का दिन पंचांग के अनुसार 7 या 8 नवंबर 2026 दोनों में आ सकता है — सूर्योदय के समय चतुर्दशी जिस दिन हो, वही अभ्यंग स्नान का दिन है।
यह प्रचलित परंपरा के आधार पर लिखी संक्षिप्त कथा और विधि है। क्षेत्र, परिवार और संप्रदाय के अनुसार रीति-रिवाज बदल सकते हैं; अपनी परंपरा या पंडित जी के निर्देश को प्राथमिकता दें। तिथि दिल्ली के लिए गणना की गई है।