आज का गीता श्लोक
2026-10-17 · भगवद्गीता 18.66
सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वां सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥
सरल अर्थ
सब धर्मों (कर्तव्यों की चिंता) को छोड़कर केवल मेरी शरण में आओ; मैं तुम्हें सब पापों से मुक्त करूँगा, शोक मत करो।
संस्कृत पाठ भगवद्गीता का मूल पाठ है। अर्थ इस साइट के लिए सरल शब्दों में लिखे गए भाव हैं, किसी प्रकाशित टीका का अनुवाद नहीं।
और श्लोक
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